ज़फ़र महल, महरौली – बहादुर शाह ज़फ़र का अधूरा मकबरा और दिल्ली का आखिरी मुगल महल
दिल्ली की पुरानी गलियों में अब भी मुगल दौर की यादें ज़िंदा हैं। इन्हीं में एक नाम है ज़फ़र महल, जिसे दिल्ली का आखिरी शाही महल कहा जाता है। यह सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि उस दौर का प्रतीक है जब मुगल अपने अंतिम पन्नों पर थी। महरौली के दिल में बसा यह महल, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र की अधूरी ख्वाहिश से जुड़ा हुआ है।
ज़फ़र महल का निर्माण और इतिहास
19वीं सदी की शुरुआत में अकबर शाह द्वितीय ने इस महल का निर्माण शुरू कराया था। उद्देश्य था कि महरौली में उनके आराम और ठहरने के लिए एक आलीशान जगह हो। बाद में उनके बेटे बहादुर शाह ज़फ़र ने इसे और सुंदर और भव्य बनवाया। उन्होंने महल में विशाल हाथी गेट, बड़ा आंगन और कई कमरे जोड़े। यह महल खासतौर पर गर्मियों के मौसम और महरौली में होने वाले मशहूर फूलवालों की सैर के दौरान शाही निवास के रूप में प्रयोग किया जाता था।
बहादुर शाह ज़फ़र की कब्र और दफ़न स्थान
1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने बहादुर शाह ज़फ़र को रंगून (म्यांमार) भेज दिया, जहां उनकी मृत्यु हुई और उन्हें वहीं दफ़नाया गया। इस वजह से ज़फ़र महल में उनकी कब्र के लिए बनाई गई जगह आज भी खाली पड़ी है, जो उनके अधूरे सपने की याद दिलाती है।
मोती मस्जिद – ज़फ़र महल
महल परिसर में मौजूद मोती मस्जिद का निर्माण 1709 के आसपास बहादुर शाह प्रथम ने करवाया था। सफेद पत्थरों से बनी यह सादगी भरी मगर खूबसूरत मस्जिद, शाही परिवार की निजी इबादतगाह थी। यह मुगल काल की सुरुचिपूर्ण वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है।
महरौली के ज़फ़र महल में सो रहे हैं ये तीन मुगल बादशाह
मोती मस्जिद के पास एक छोटा कब्रिस्तान है, जिसमें तीन मुगल बादशाह –
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बहादुर शाह प्रथम
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शाह आलम द्वितीय
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अकबर शाह द्वितीय
दफ़न हैं। ये कब्रें इस जगह के शाही अतीत की गवाही देती हैं।
ज़फ़र महल का टिकट, समय और कैसे पहुंचे?
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प्रवेश शुल्क – कोई टिकट नहीं, प्रवेश पूरी तरह मुफ्त है।
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समय – सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।
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कैसे पहुंचे –
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मेट्रो – नजदीकी स्टेशन कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन है, वहां से ऑटो या रिक्शा लेकर पहुंच सकते हैं।
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बस/टैक्सी – दिल्ली के किसी भी हिस्से से आसानी से उपलब्ध।
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निजी वाहन – सीधा महरौली तक ड्राइव कर सकते हैं।
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ज़फ़र महल दिल्ली का एक अनमोल ऐतिहासिक धरोहर है, जो मुगल सल्तनत के अंतिम अध्याय को बयां करता है। यहां की वास्तुकला, मोती मस्जिद और पास का कब्रिस्तान आज भी अतीत को जीवित रखते हैं। अगर आप दिल्ली की विरासत को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो ज़फ़र महल ज़रूर जाएं। दिल्ली के और भी ऐतिहासिक स्थलों के बारे में जानने के लिए हमारी वेबसाइट TravelDelhiVlogs.com देखें, या अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया का सहारा ले सकते हैं।




