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फरीदाबाद की वो मस्जिद, जिससे शुरू हुआ शहर – जानिए शेख़ फरीद की कहानी

फरीदाबाद की वो मस्जिद, जिससे शुरू हुआ शहर – जानिए शेख़ फरीद की कहानी

फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद एक बहुत ही पुरानी और खूबसूरत मस्जिद है, जिसे मुगल समय में बनवाया गया था। इस मस्जिद को शेख फरीद ने साल 1605 ईस्वी में बनवाया था, जब उन्होंने फरीदाबाद शहर की नींव रखी थी। यह मस्जिद सिर्फ नमाज़ पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि उस समय की शाही और धार्मिक पहचान भी थी। फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद की इमारत बहुत शानदार है आज भी यह मस्जिद फरीदाबाद के पुराने इलाके में मौजूद है और लोग यहां इबादत करने के साथ-साथ इसके इतिहास को जानने भी आते हैं। अगर आप इतिहास, मुगल कला या पुराने धार्मिक स्थानों में रुचि रखते हैं, तो आपको एक बार फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद ज़रूर देखनी चाहिए।

फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद का इतिहास

फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद एक बहुत पुरानी और खास मस्जिद है, जो करीब 400 साल पहले, यानी 1605 ईस्वी में बनाई गई थी। यह मस्जिद उस समय बनी जब दिल्ली और आगरा के बीच का रास्ता बहुत जरूरी हुआ करता था। इसी रास्ते की सुरक्षा के लिए फरीदाबाद शहर बसाया गया और उसी के साथ यह मस्जिद भी बनाई गई। यह मस्जिद सिर्फ नमाज़ पढ़ने की जगह नहीं थी, बल्कि लोगों के मिलने, बैठने और समाज के कामों का भी केंद्र थी। इसकी इमारत बहुत सुंदर है — इसमें ऊँचा दरवाज़ा है, दीवारों पर कुरान की आयतें लिखी हैं, छत पर कंगूरे (नुकीले डिजाइन) हैं और बीच में एक बड़ा गोल गुंबद (गोल आकार की छत) बना है। मस्जिद के आँगन में एक पुरानी क़ब्र भी है, जो बाद में बनी और आज भी लोग वहाँ दुआ माँगने जाते हैं।

शेख-फरीद-कौन-थे

Shahi Jama Masjid Old Faridabad

शेख फरीद कौन थे?

शेख फरीद, जिन्हें मुर्तज़ा खान भी कहा जाता है, एक बड़े मुगल अफसर थे। वे उस समय के बादशाह जहाँगीर के खास आदमी थे। शेख फरीद को दिल्ली से आगरा तक के इलाके की देखभाल का काम मिला था। उन्होंने फरीदाबाद शहर की शुरुआत की और यहाँ पर कई ज़रूरी चीजें बनवाईं जैसे ये शाही जामा मस्जिद, एक किला, एक सराय (मुसाफिरों के रुकने की जगह), और तालाब। उनका मकसद था कि रास्ते पर चलने वाले लोगों को सुरक्षा और आराम मिले। ध्यान देने की बात ये है कि ये शेख फरीद कोई सूफ़ी संत नहीं थे। बहुत लोग उन्हें “बाबा फरीद” नाम के मशहूर सूफ़ी संत समझ लेते हैं, लेकिन वो अलग व्यक्ति थे और उनका फरीदाबाद से कोई रिश्ता नहीं था।

Sheikh Farid kon thai

शेख फरीद की कब्र सराय शाहजी के पास, दिल्ली के मालवीय नगर

मस्जिद के आँगन में बनी एक पुरानी क़ब्र

फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद के आँगन में एक पुरानी क़ब्र भी बनी हुई है, जो मस्जिद के बनने के करीब 200 साल बाद यहाँ बनाई गई थी। यह क़ब्र किसकी है, इसके बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है, लेकिन स्थानीय लोग इसे बहुत मानते हैं। लोग यहाँ अक्सर चादर चढ़ाने, फूल चढ़ाने और दुआ माँगने आते हैं। इस क़ब्र की वजह से मस्जिद को एक और रूहानी (आध्यात्मिक) महत्व मिलता है। मस्जिद में सिर्फ नमाज़ ही नहीं होती, बल्कि लोग यहाँ दिल से दुआएँ भी माँगते हैं। जो भी यहाँ आता है, वह इस क़ब्र के पास कुछ पल ज़रूर बिताता है। यह जगह लोगों के विश्वास और आस्था का एक शांत कोना है।

आँगन-में-बनी-एक-पुरानी-क़ब्र

आँगन में बनी एक पुरानी क़ब्र

मस्जिद का स्थान

फरीदाबाद की शाही जामा मस्जिद फरीदाबाद के पुराने इलाके, यानी Old Faridabad की मुख्य बाज़ार (मार्केट) में स्थित है। यह जगह आमतौर पर काफी भीड़भाड़ वाली रहती है, लेकिन मस्जिद के अंदर पहुँचते ही एक अलग ही शांति और सुकून का अहसास होता है। बाजार की हलचल के बीच यह मस्जिद एक रूहानी कोना है, जहाँ लोग इबादत और दुआ के लिए आते हैं।

कैसे पहुँचें?
  • अगर आप अपनी गाड़ी से जा रहे हैं, तो Google Maps पर “Shahi Jama Masjid, Old Faridabad” सर्च करें।
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