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दिल्ली का किला राय पिथौरा

दिल्ली का किला राय पिथौरा

आज हम आपको दिल्ली के सबसे पुराने किलों में से एक – किला राय पिथौरा के बारे में बताने जा रहे हैं। यह ऐतिहासिक दिल्ली का किला 12वीं शताब्दी में राजा पृथ्वीराज चौहान द्वारा बनवाया गया था। असल में यह किला लाल कोट का विस्तार था, जिसे पहले तोमर वंश के राजा अनंगपाल तोमर ने बनवाया था। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि किला राय पिथौरा कहां है, इसका इतिहास क्या है, इसे किसने और क्यों बनवाया, और आप इस पुराने किले तक कैसे पहुंच सकते हैं। अगर आप दिल्ली के ऐतिहासिक किले देखने में रुचि रखते हैं या दिल्ली का इतिहास जानना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है।

किला राय पिथौरा का इतिहास

किला राय पिथौरा, दिल्ली का सबसे पुराना और ऐतिहासिक किला माना जाता है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा पृथ्वीराज चौहान ने करवाया था। दरअसल, यह किला पहले से मौजूद लाल कोट का विस्तार था, जिसे 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा अनंगपाल तोमर द्वितीय ने बनवाया था। जब चौहान वंश ने तोमर वंश से दिल्ली पर अधिकार कर लिया, तो पृथ्वीराज चौहान ने लाल कोट के चारों ओर मजबूत दीवारें बनवाकर इसे एक सुरक्षित किले का रूप दे दिया। इसी वजह से इसका नाम पड़ा आज इस किले की कई जगहों पर हमें सिर्फ पुरानी दीवारों (ancient fort walls) के अवशेष ही देखने को मिलते हैं, जो इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं। ये दीवारें दिल्ली के महरौली, साकेत और किशनगढ़ जैसे इलाकों में दिखाई देती हैं।

पृथ्वीराज चौहान कौन थे?

राजा पृथ्वीराज चौहान, भारत के सबसे प्रसिद्ध योद्धा राजाओं में से एक थे। वे चौहान वंश के शासक थे और उन्होंने दिल्ली और अजमेर पर शासन किया। उनका जन्म 1166 ईस्वी में हुआ था पृथ्वीराज चौहान को तराइन की पहली लड़ाई (1191 ई.) में मोहम्मद गौरी पर शानदार जीत और तराइन की दूसरी लड़ाई (1192 ई.) में पराजय के लिए जाना जाता है। दूसरी लड़ाई में हार के बाद भारत में मुस्लिम शासन की नींव पड़ी।

राय-पिथौरा

दिल्ली का पहला शहर – महरौली

दिल्ली का सबसे पुराना शहर महरौली माना जाता है, जहां पर आज से करीब 1000 साल पहले तोमर वंश के राजा अनंगपाल तोमर ने एक मजबूत किला बनवाया जिसे लाल कोट कहा गया। यह दिल्ली की पहली दीवारबंद नगरी थी। बाद में 12वीं शताब्दी में चौहान वंश के राजा पृथ्वीराज चौहान ने लाल कोट का विस्तार करवाया और इसे नया नाम दिया – किला राय पिथौरा। इस किले की दीवारें आज भी दिल्ली के महरौली और साकेत क्षेत्र में दिखाई देती हैं। पृथ्वीराज चौहान वही महान योद्धा थे जिन्होंने मोहम्मद गौरी के खिलाफ तराइन की लड़ाइयां लड़ीं। आज महरौली सिर्फ एक पुराना इलाका नहीं, बल्कि दिल्ली के इतिहास का सबसे पहला अध्याय है, जहां कुतुब मीनार, कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह और कई प्राचीन स्मारक मौजूद हैं। अगर आप दिल्ली के ऐतिहासिक किले और पुराने शहरों को जानना चाहते हैं, तो किला राय पिथौरा, लाल कोट और महरौली ज़रूर देखना चाहिए।

    1. संजय वन (Sanjay Van), महरौली के पास   यहाँ आपको किला राय पिथौरा की पत्थर की बड़ी-बड़ी दीवारें जंगल के बीच में दिखाई देंगी। यह हिस्सा लाल कोट और किला राय पिथौरा दोनों का हिस्सा माना जाता है।
    2. कुतुब मीनार के पास (Qutub Complex के आसपास)  कुतुब मीनार के पीछे की ओर कुछ पुरानी दीवारें आज भी दिखाई देती हैं जो उस पुराने किले की सीमा का हिस्सा मानी जाती हैं।
    3. साकेत और प्रेस एन्क्लेव रोड के पास इन क्षेत्रों में भी कुछ जगहों पर पुरानी दीवारें दिखती हैं

किला-राय-पिथौरा

किला राय पिथौरा और लाल कोट सिर्फ ईंट-पत्थरों से बने पुराने किले नहीं हैं, बल्कि ये दिल्ली की शुरुआत और उसके गौरवशाली अतीत की निशानियाँ हैं। अनंगपाल तोमर द्वारा बसाया गया लाल कोट और फिर पृथ्वीराज चौहान द्वारा उसका विस्तार कर बनाए गए किला राय पिथौरा ने दिल्ली की ऐतिहासिक नींव रखी। आज भले ही इन किलों की दीवारें टूट चुकी हों, लेकिन इनका इतिहास आज भी हमारे दिलों में ज़िंदा है। अगर आप दिल्ली के सच्चे इतिहास को महसूस करना चाहते हैं, तो महरौली जाकर इन किलों के बचे हुए हिस्सों को जरूर देखिए – ये आपको समय में पीछे ले जाकर उस दौर की झलक दिखा देंगे जब दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक सपना थी।

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