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सलीम चिश्ती दरगाह फतेहपुर सीकरी – इतिहास और जानकारी

सलीम चिश्ती दरगाह फतेहपुर सीकरी – इतिहास और जानकारी

आगरा के पास फतेहपुर सीकरी में मौजूद सलिम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह शरीफ़ एक ऐसी मुक़द्दस जगह है, जहाँ लोग यक़ीन और उम्मीद के साथ आते हैं। यह दरगाह सफ़ेद संगमरमर से बनी है और यहाँ हज़रत की मुबारक मजार है। ज़ायरीन का मानना है कि यहाँ मांगी गई दुआ, अल्लाह के हुक्म से, कबूल होती है। हर साल हज़ारों लोग दूर-दराज़ से यहाँ आते हैं, जाली में धागा बांधते हैं और अपनी हाजत पूरी होने की इल्तिज़ा करते हैं।

सलिम चिश्ती दरगाह फतेहपुर सीकरी

उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में फतेहपुर सीकरी एक मशहूर जगह है, जो अपने पुराने मुग़ल समय के भवनों के लिए जानी जाती है। यहाँ की सबसे खास जगह है सलिम चिश्ती दरगाह। यह एक सफ़ेद संगमरमर से बनी दरगाह है, जहाँ सूफ़ी संत हज़रत सलिम चिश्ती की मजार है। लोग मानते हैं कि यहाँ की दुआ हमेशा कबूल होती है। कहा जाता है कि मुग़ल बादशाह अकबर यहाँ आए थे और उन्होंने संतान के लिए दुआ मांगी थी, जिसके बाद उनके बेटे का जन्म हुआ। अकबर ने अपने बेटे का नाम सलिम रखा और फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बना लिया। आज भी लोग यहाँ आकर जाली में धागा बाँधते हैं और अपनी इच्छा पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

सलीम चिश्ती कौन थे?

हज़रत सलिम चिश्ती , 16वीं सदी के एक मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग और वली अल्लाह थे, जो चिश्तिया सिलसिले से ताल्लुक रखते थे। आपका जन्म लगभग 1478 ईस्वी में हुआ था। आप अपनी परहेज़गारी, इल्म और लोगों की मदद करने की आदत के लिए जाने जाते थे। मुग़ल बादशाह अकबर रहमतुल्लाह अलैह को आप पर गहरा यक़ीन था। मशहूर है कि जब अकबर की औलाद नहीं हो रही थी, तो वह आपकी ख़िदमत में हाज़िर हुए और दुआ की दरख़्वास्त की। अल्लाह के फ़ज़ल से उनकी दुआ कबूल हुई और अकबर के यहाँ बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने सलिम रखा (जो आगे चलकर सम्राट जहाँगीर बने)।

दरगाह का इतिहास

हज़रत सलिम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के इंतिक़ाल के बाद, उनकी याद और फ़ज़ीलत को हमेशा ज़िंदा रखने के लिए इस मुक़द्दस दरगाह का निर्माण करवाया गया। मुग़ल बादशाह अकबर ने 1580 से 1581 ईस्वी के बीच इसे बनवाया। यह दरगाह फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के सहन (आंगन) के बीचों-बीच बनी है। सफ़ेद संगमरमर से तामीर इस दरगाह की ख़ूबसूरती देखते ही बनती है। यहाँ की बारीक संगमरमर की जालियाँ, गुंबद और मेहराबें मुग़ल फ़न-ए-तामीर (आर्किटेक्चर) की बेहतरीन मिसाल हैं। सदियों से यह जगह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि इमान, मोहब्बत और दुआओं का मरकज़ (केंद्र) रही है। आज भी यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी मज़हब के लोग आकर दुआ करते हैं और अपनी हाजत पेश करते हैं।

salim chishti tomb
वास्तुकला और विशेषताएँ

सलिम चिश्ती दरगाह शरीफ़ मुग़ल दौर की बेहतरीन तामीरात में से एक है। पूरी दरगाह सफ़ेद संगमरमर से बनी है, जो दूर से ही रूहानी नूर बिखेरती है।

  • संगमरमर की जालियाँ (जालीदार खिड़कियाँ) – यहाँ की बारीक नक्काशी वाली संगमरमर की जालियाँ (जिन्हें सुफ़ैद जाली कहा जाता है) सबसे मशहूर हैं। इन्हीं में ज़ायरीन अपनी हाजत के लिए धागा बांधते हैं।

  • गुंबद और मेहराबें – दरगाह का गुंबद गोल और सादा है, जिसके नीचे मजार शरीफ़ स्थित है। चारों तरफ़ की मेहराबें मुग़ल कला की नफ़ासत (सुंदरता) दिखाती हैं।

  • आंगन (सहन) – दरगाह जामा मस्जिद के सहन में बनी है, जहाँ संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का सुंदर मेल दिखाई देता है।

  • क़ब्र का हिस्सा – अंदर मजार शरीफ़ पर हरे रंग का चादर-ए-मुबारक बिछा होता है, और आस-पास इत्र की खुशबू माहौल को महकाती है।

यह दरगाह न सिर्फ़ अपनी रूहानी फ़ज़ीलत के लिए, बल्कि अपनी बे-मिसाल ख़ूबसूरती के लिए भी मशहूर है।

सलिम चिश्ती दरगाह का स्थान

यह दरगाह शरीफ़ उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के सहन (आंगन) में स्थित है। यह पूरी तरह एक ऐतिहासिक और मुक़द्दस जगह है, जहाँ रोज़ाना सैकड़ों ज़ायरीन हाज़िरी देने आते हैं। Google Maps पर देखें

कैसे पहुँचें?

हवाई मार्ग

सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा आगरा एयरपोर्ट है, जो दरगाह से करीब 40 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस के ज़रिये आसानी से पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग

नज़दीकी रेलवे स्टेशन फतेहपुर सीकरी रेलवे स्टेशन है, जो दरगाह से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। बड़ा स्टेशन आगरा कैंट है, जो करीब 37 किलोमीटर दूर है।

सड़क मार्ग
  • दिल्ली से दूरी – लगभग 230 किलोमीटर

  • जयपुर से दूरी – लगभग 200 किलोमीटर

  • आगरा से दूरी – लगभग 40 किलोमीटर

दिल्ली, आगरा और जयपुर से यहाँ के लिए बस, टैक्सी और अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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