दिल्ली का सबसे पुराना ईदगाह: हौज़ खास की अनकही दास्तान
दिल्ली की गलियों और बस्तियों में इतिहास हर जगह साँस लेता है। यहाँ की मिट्टी, यहाँ के पत्थर और यहाँ की हवाएँ भी बीते ज़माने की गवाही देती हैं। इन्हीं ख़ामोश गवाहों में से एक है हौज़ खास ईदगाह। आज जब भी मैं इस ईदगाह की दीवारों को देखता हूँ तो ऐसा लगता है मानो यह जगह सिर्फ़ नमाज़ अदा करने की नहीं, बल्कि हमारी तहज़ीब और रूहानियत की भी एक जिंदा निशानी है।
हौज़ खास ईदगाह का इतिहास
दिल्ली के हौज़ खास इलाके में बसा यह ईदगाह, पहले खरेहरा का ईदगाह कहलाता था। इसकी उम्र लगभग 600 साल से भी ज़्यादा है। इतिहासकारों के मुताबिक इसका निर्माण 1404–05 ईस्वी (807 हिजरी) में हुआ था। इसे दिल्ली सल्तनत के प्रभावशाली सरदार मल्लू ख़ान (इक़बाल ख़ान) ने बनवाया था।
वास्तुकला और ख़ासियत
हौज़ खास ईदगाह को देखने पर एक सादगी भरी मज़बूती नज़र आती है।
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इसकी पश्चिमी दीवार पर 11 मेहराबें बनी हैं, जिनकी रौनक आज भी वैसी ही लगती है।
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बीच में एक ऊँचा मिम्बर है, जहाँ तक पहुँचने के लिए 13 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। सोचिए, ईद की नमाज़ में जब इमाम यहाँ से खुत्बा पढ़ते होंगे तो कितनी रूहानी फिज़ा बनती होगी।
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दोनों किनारों पर बने गोल बुर्ज इसे एक क़िले जैसा रूप देते हैं।
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सबसे दिलचस्प बात है दक्षिणी बुर्ज पर लगा शिलालेख, जिसमें उस दौर की वीरानी और मल्लू ख़ान की तारीफ़ दर्ज है।
हौज़ ख़ास ईदगाह कहाँ है?
यह ईदगाह आज भी हौज़ खास एन्क्लेव, नई दिल्ली (पुराना खरेहरा गाँव) में मौजूद है। अगर आप दिल्ली घूमने आए हैं और चोर मीनार देखने जाते हैं, तो उसके बिल्कुल नज़दीक ही यह ईदगाह मिल जाएगी। अच्छी बात यह है कि इसे अब ASI (Archaeological Survey of India) ने संरक्षित स्मारक घोषित किया है।
वहाँ तक कैसे पहुँचे?
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मेट्रो से: सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन है हौज़ खास मेट्रो स्टेशन (येलो और मैजेंटा लाइन)। वहाँ से ईदगाह लगभग 10–15 मिनट की दूरी पर है।
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बस से: DTC की कई बसें हौज़ खास और ग्रीन पार्क से होकर जाती हैं।
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ऑटो/कार से: Google Maps पर “Hauz Khas Idgah” डालें और आराम से पहुँच जाएँ।
मेरी राय
अगर आप दिल्ली के मशहूर किले, क़ुतुब मीनार या जामा मस्जिद तो देख ही चुके हैं, तो एक बार इस ईदगाह को भी ज़रूर देखने जाइए। यह जगह भी उतनी ही पुरानी और दिलचस्प है, बस फर्क इतना है कि इसे लोग कम जानते हैं। शायद इसकी सादगी ही इसकी असली खूबसूरती है।
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