दिल्ली में कहाँ है हज़रत बाबा फरीद के भाई की दरगाह? जानिए इस रूहानी जगह की खासियत
अदचिनी की भीड़भाड़ से दूर, एक शांत गली में मौजूद है हज़रत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह – एक ऐसी दरगाह जो न सिर्फ हज़रत बाबा फरीद गंज-ए-शक्कर के भाई की है, बल्कि हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के आध्यात्मिक गुरु की भी। यह वो जगह है जहाँ दिल सुकून पाता है, और रूह खुदा के करीब होती है। आइए आज हम आपको दिखाते हैं दिल्ली की इस छुपी हुई सूफी धरोहर को – अदचिनी की दरगाह।
कौन थे हज़रत नजीबुद्दीन मुतवक्किल?
हज़रत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रह. बाबा फरीद गंज-ए-शकर रह. के भाई और खलीफ़ा थे। उनकी परवरिश में ही आगे चलकर हिंदुस्तान के सबसे बड़े सूफी वली, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रह., तालीम और रूहानियत सीखते रहे। जब हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रह. ने क़ाज़ी बनने की दुआ के लिए कहा, तो शेख नजीब ने सिर्फ इतना कहा: “तुम्हें इससे भी ऊंचा मक़ाम मिलेगा।” यह शब्द एक वली की नज़र और उसकी फ़रासत को दिखाते हैं।
हज़रत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल
दरगाह की बनावट और रूहानी रहस्य
यह दरगाह बाहर से देखने में एक साधारण मकान जैसी लगती है, मगर इसके अंदर का रूहानी असर दिल को गहराई से छू लेता है।दरगाह के भीतर एक छोटे से कमरे में कुल चार कब्रें मौजूद हैं:
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हज़रत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाह अलैह
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बीबी फातिमा साहिबा (हज़रत बाबा फरीद रहमतुल्लाह अलैह की बेटी)
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शेख अहमद (हज़रत शेख नजीबुद्दीन के बेटे)
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शेख इस्माईल (दूसरे बेटे)
पास में ही माई साहिबा की दरगाह
इसी परिसर से सटी दीवार के पार, मौजूद है माई साहिबा की दरगाह – जो हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रह. की मां थीं। यह खूबसूरत इत्तेफाक है कि जहां बेटे के उस्ताद हैं, वहीं मां का भी मक़ाम है। एक ही गली में दो बड़ी हस्तियां — ये जगह हर उस इंसान को खींच लाती है जो दिल में इश्क-ए-इलाही लिए आता है।
कैसे पहुंचे?
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निकटतम मेट्रो स्टेशन: चिराग दिल्ली मेट्रो (मैजेंटा लाइन)
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वहां से दूरी: सिर्फ 5 मिनट की पैदल दूर
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लोकेशन: अदचिनी गांव, सिरी फोर्ट रोड के नजदीक, दिल्ली
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Google Map पर खोजें: Sheikh Najibuddin Mutawakkil Dargah, Adchini Delhi
इस दरगाह में शोर-शराबा नहीं, बल्कि सुकून और शांति मिलती है। यहाँ दिखावा नहीं होता, बस चुपचाप बरकत बरसती है। अगर आप दिल्ली की भीड़-भाड़ से दूर एक शांत जगह ढूंढ रहे हैं जहाँ दिल और रूह को सुकून मिले, तो हज़रत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह ज़रूर जाएं। यह दरगाह सिर्फ एक ज़ियारत की जगह नहीं, बल्कि सूफ़ी इतिहास का एक सुनहरा हिस्सा भी है।
हजरत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह दूर से
बीबी फातिमा साहिबा (हज़रत बाबा फरीद रहमतुल्लाह अलैह की बेटी)
हजरत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह है
हज़रत शेख नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाह अलैह




